श्रीराम के आदर्शों को, युवा पीढ़ी को बताने की आवश्यकता-प्रो. आनंद प्रकाश

मोतिहारी। श्रीराम हम सभी के रोम-रोम में है। उनका आदर्श चरित्र पूज्य और जीवन जीने की मार्ग प्रशस्त करता है। वह प्रातः स्मरणीय है । वह अखण्ड भारत भूमि के ऐसे महानायक है जिनका सम्पूर्ण जीवन हमें धर्म, अध्यात्म, राजनीति, परोपकार, पारिवारिक कर्तव्य, मित्रता आदि की गहरी समझ प्रदान करती है। 

उक्त बातें श्री रामनवमी के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक आयोजन चैता गायन एवं प्रबुद्ध समागम में बतौर मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. आनन्द प्रकाश, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी ने कहीं। भारद्वाज आश्रम, श्रीकृष्ण नगर में आयोजित इस कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आनंद प्रकाश ने कहा कि आज हमें राम के आदर्शों को युवा पीढ़ी को बताने की आवश्यकता है। भारत को यदि पूरे विश्व में शीर्ष नेतृत्वकर्ता के रूप में पदस्थापित करना है तो हमें रामराज्य की संकल्पना को साकार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम अधिक से अधिक होने चाहिए जिससे भारतीय प्राचीन गायन परम्परा और श्रीराम के आदर्शों के बारें में अधिक से अधिक लोगों को ज्ञात हो सकें। 

चैता गायन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय के डीन एवं गांधी परिसर के निदेशक प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने कहा कि गायन की जो अनोखी विविध परम्परा भारत भूमि पर है वह अन्यत्र कहीं नहीं हैं। उत्सव के महत्व और ऋतु व मौसम के अनुसार लोक गायन की हमारी समृद्ध परम्परा है। चैत्र माह से भारतीय हिन्दू पञ्चांग के अनुसार वर्ष का प्रारम्भ होता है साथ ही रामलला का जमोत्सव और फसलों के कटाई का समय होता है। विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में तो चैता गायन विभिन्न विषयों पर खुशी के राग में गाई जाती रही है। 

कार्यक्रम के संयोजक व सूत्रधार महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार झा ने कहा कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य लुप्त होती हमारी सांस्कृतिक गायन परम्परा को जीवंत करना और विभिन्न पर्व, त्यौहार जैसे महत्वपूर्ण अवसरों को प्रबुद्धजनों के साथ सहभागिता करना है। डॉ. झा ने चैता गायन पर अपनी महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी। संचालन एमजीसीयूबी में हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर व कार्यक्रम के सह आयोजक डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने किया। 

चैता गायन पर शास्त्रीय एवं लोक गायन विधाओं में कलाकारों द्वारा सुंदर प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से भारद्वाज आश्रम के एस. एस. भारद्वाज, मुख्य नियंता प्रो. प्रणवीर सिंह, प्रो. आन्त्रण त्राण पाल, प्रो. अजय कुमार गुप्ता, प्रो. सुनील कुमार श्रीवास्तव, डॉ. शतरुद्र प्रकाश सिंह, डॉ. जुगुल किशोर दाधीच, डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र, डॉ. विश्वेश वाग्मी, डॉ. भव नाथ पाण्डेय, डॉ. उमेश पात्रा, डॉ. बिश्वजीत बर्मन आदि शिक्षक एवं शहर के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।

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