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पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करते स्वयंसेवी संस्था

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जिस प्रकार प्रतिदिन योगा करते हैं, उसी प्रकार प्रति सप्ताह हर व्यक्ति एक पौधा लगाएं।  मोतिहारी। बंजरिया प्रखंड के तरकुलवा में कृषक विकास समिति मोतिहारी अध्यक्ष उमाशंकर प्रसाद ने करुअइनी, जामुन एवं अन्य औषधीय पौधा लगया। इन्होंने पौधा लगाते हुए कहा कि मामूली उपाय से हम अपने पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। बस जरुरत है, हमें अपने दैनिक जीवन में बदलाव लानेका।जिस प्रकार प्रतिदिन योगा करते हैं, उसी प्रकार प्रति सप्ताह हर व्यक्ति एक पौधा लगाएं। इस तरह आसपास के वातावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। साथ ही आने वाले संकट को भी टाला जा सकता है। और आम लोगों को होने वाली कोरोना जैसी कई जानलेवा बीमारियां को दूर भगाया जा सकता है। इन सबके लिए जरूरी है कि व्यक्ति स्वयं पर्यावरण के प्रति जागरूक होना होगा। इन मामूली उपायों को व्यवहार में लाकर इसके सरंक्षण के लिए कार्य करे। इस कार्य की शुरूआत अपने घर से करने की जरूरत है। श्री प्रसाद के नेतृत्व में जामुन,करूअईनी एवं अन्य औषधीय गुण युक्त पौधारोपण का फायदा भी बताया। कहा कि जामुन का फल खाने से डायबिटीज की बीमारी दूर ...

कॉरपोरेट संचार के क्षेत्र में आगे असीम संभावनाएंः प्रो. आतिश पाराशर

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एमजीसीयूबी के मीडिया अध्ययन विभाग की ओर से ई-गुरुमंत्र ज्ञान श्रृंखला की पांचवी कड़ी का हुआ आयोजन  कॉरपोरेट संचार के विविध पहलुओं पर प्रसिद्ध संचारविद प्रो.अतीश पाराशर ने विद्यार्थियों का किया मार्गदर्शन    मोतिहारी। दक्षिण बिहार केंद्रीय विवि के छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष सह मीडिया विभागाध्यक्ष प्रो.अतीश पाराशर ने कहा है कि जनसंपर्क विशेषकर कॉरपोरेट संचार के क्षेत्र में चुनौतियां हैं तो असीम संभावनाएं भी हैं। इसका दायरा केवल कंपनी के लाभ या छवि निर्माण तक सीमित नहीं है, यह प्रमुखतः संकट का ऐसा प्रबंधन है जहां सच बोल नहीं सकते जबकि झूठ बोलने की मनाही है। सच्चाई को इस रूप में अभिव्यक्त करना जिससे संस्थान का हित सर्वोपरि रहे और लोगों तक सही सूचना भी जाए। संचार के विद्यार्थियों को इसकी कला विकसित करनी होगी।  वे महात्मा गांधी केंद्रीय विवि मोतिहारी के मीडिया अध्ययन विभाग की ओर से आयोजित गुरुमंत्र शृंखला की पांचवी कड़ी में कॉरपोरेट संचारः व्यावहारिक अनुप्रयोग और भविष्य की संभावनाएं विषय पर विद्यार्थियों से रूबरू थे। उन्होंने कहा कि यह क्राइसिस...

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सपना साकार

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मोतिहारी। बंजरिया प्रखण्ड के अम्बिका नगर में कृषक विकास समिति मोतिहारी के तत्वाधान में महिला समूह की बैठक हुई। इसके अध्यक्ष उमाशंकर प्रसाद ने कहा कि इस समूह को देखकर मेरा सपना साकार होते दिख रहा है।जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई दशकों से प्रयत्नशील कृषक विकास समिति ने कई महिलाओं को स्वावलंबी किया है। समूह बनने के बाद उनके जीवन शैली में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। वे कल तक दूसरे पर आश्रित रहती थी, लेकिन अब स्वयं अपने पैर पर खड़ी हुई है और अपने घर परिवार को चलाने में सुदृढ़ भी हुई हैं ,खासकर के बच्चों को शिक्षा देने के मामले में काफी जागरूकता आई है । संस्था के अथक मेहनत के बदौलत आज महिला संगठन काफी आगे बढ़े हैं, और हर क्षेत्र में ये लोग कार्य कर रहे हैं ।इसी कड़ी में अध्यक्ष उमाशंकर प्रसाद ने समूह में बैठे महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पहले छोटी बचत से समूह अपने गरीब सदस्यों को शुरू में 15000 रु आंतरिक ऋण दिया। आज धीरे धीरे अपने अल्प बचत को नियमित कर सभी सदस्यों ने समूह में लगभग लाखों लाख रुपए जमा किया और अपने कई सदस्यों को रोजगार खडा करने मे मदत की।लड...

मातृभाषा का अर्थ भावनाओं का पारदर्शी प्रस्तुतीकरण : प्रो0 ए.के. सिंह

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(त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह वेबिनार ’’राष्ट्रीय शिक्षानीति: हिन्दी और अन्य मातृ भाषाएं’’ का समापन) भावनाओं का पारदर्शी प्रस्तुतीकरण है मातृभाषा। स्थानीय स्तर पर हर भाव के एक शब्द हैं, भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मातृभाषा में पर्याप्त शब्दावलियाॅ हैं। शब्दावलियों से संप्रेषण में सरलता होती है। यह बातें कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो0 राजेन्द्र सिंह (रज्जूभैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति प्रो0 प्रो. ए. के. सिंह ने कही। वह केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारत सरकार एवं नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह वेबिनार ’’राष्ट्रीय शिक्षानीति: हिन्दी और अन्य मातृ भाषाएं’’ के समापन कार्यक्रम में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में बोल रहे थे। उन्होेंने आगे कहा कि आज माध्यम ही भाषा है। हमें अपने शब्दावलियों के ज्ञान को बढ़ाना चाहिए। किसी भी भाषा को सीखने के लिए इच्छा होनी चाहिए। भाषा और तकनीक साथ साथ चलती है। जीवन पर्यंत हम भाषाएं सीखते हैं। तकनीक के इस दौर में सोशल मीडिया के उपयोग में संयम जरूरी है। ...

महामहिम राष्ट्रपति डॉ० के०आर० नारायणन के बारे में रोचक बातें

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Story  देश के पहले दलित राष्ट्रपति थे। उनका सम्पूर्ण जीवन सघर्ष से भरा हुआ था। वे केरल के एक गांव में फूस की झोपड़ी में 1920 में पैदा हुए। उनके पिता आयुर्वेदिक औषधिओं के ज्ञाता थे, इसी से वे अपना परिवार चलाते थे। गरीबी इतनी भयंकर कि 15 किमी. दूर सरकारी स्कूल में पैदल पढ़ने जाते थे। कभी-कभी फीस न होने पर उन्हें कक्षा से बाहर खड़ा होना पड़ता था। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की। ज़ब वह भारत लोटे तो उनके प्रोफेसर ने एक पत्र भारत के प्रधान मंत्री जवाहर लाल के नाम उन्हें दिया उस पत्र में उनकी प्रतिभा का उल्लेख था। चूंकि उन्होंने तीन वर्ष का कोर्स 2 साल में विशेष योग्यता के साथ पास किया था। ज़ब वह पत्र उन्होंने नेहरू जी को दिया तो नेहरू जी ने उन्हें राजदूत नियुक्त कर दिया। सेवानिवृत होने पर उन्हें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया। एक बार वे उप राष्ट्रपति रहे। उसके बाद वे भारत के दसवें एवं पहले दलित राष्ट्रपति बने। 1. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को बिना हस्ताक्षर किये फाइल यह कहते हुए वापस कर दी कि 10 न्यायाधीशों के इस पेनल में ...

मातृभाषा का संरक्षण हमारा मूलभूत अधिकार

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(त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह वेबिनार ’’राष्ट्रीय शिक्षानीति: हिन्दी और अन्य मातृ भाषाएं’’ का द्वितीय दिन) केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारत सरकार एवं नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह वेबिनार ’’राष्ट्रीय शिक्षानीति: हिन्दी और अन्य मातृ भाषाएं’’ के द्वितीय दिन के तृतीय सत्र में मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रोफेसर ऋषिकांत पांडे ने कहा कि नई शिक्षा नीति में व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की चर्चा की गई है। शिक्षा के मूल में कौशल का विकास होना आवश्यक है ज्ञान बढ़ने के साथ-साथ व्यक्ति के उत्तरदायित्व भी बढ़ते जाते हैं। ज्ञान और उत्तरदायित्व एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। आज के समय में विज्ञान और तकनीक का उद्देश्य मानवता का विकास करना होना चाहिए। सांस्कृतिक समानता के कारण ही एक भाषा का दूसरी भाषा में अनुवाद हो सकता है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया के सहायक आचार्य डॉ किंशुक पाठक ने कहा कि लगभग तीन सौ मातृभाषा मिटने के...

त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह वेबिनार ’’राष्ट्रीय शिक्षानीति: हिन्दी और अन्य मातृ भाषाएं’’ का हुआ शुभारम्भ

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कौशल और शिक्षा को मातृभाषा से जोड़ना चाहिए: प्रो0 टी.वी. कट्टीमनी प्रयागराज। मातृभाषा में शिक्षा वर्तमान समय का सर्वाधिक सराहनीय कार्य है। हमारे समाज में जो कौशल है उसको शिक्षा के साथ मातृभाषा से जोड़ना चाहिए। उपदेश देना ही नहीं आचरण भी करना चाहिए। यह बातें केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के कुलपति प्रो0 टी.वी. कट्टीमनी ने केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारत सरकार एवं नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह वेबिनार ’’राष्ट्रीय शिक्षानीति: हिन्दी और अन्य मातृ भाषाएं’’ के प्रथम दिन मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहीं। उहोंने आगे कहा कि वाटर हार्वेस्टिंग की तकनीक भारतीय मातृभाषा की तकनीक है लेकिन लोग इसको अंग्रेजी के माध्यम से पढ़ाने की कोशिश करते हैं। देश में नौकरी पहले उनके लिए होनी चाहिए जिनकी शिक्षा मातृभाषा में हो और जो किसान का बेटा हो। जो इस देश में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं उनके लिए मातृभाषा को अनिवार्य करना चाहिए।  कुलाधिपति, श्री जे.एन मिश्र जी ने सभी का स्वागत करते हुए अपने आशीर्वचन में कहा कि...