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बिना एग्जाम के होंगे UG और PG के छात्र, यहां जानें डिटेल।।Mahatma Gandhi Central University Exam Cancelled: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की यूजी और पीजी की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं.

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Mahatma Gandhi Central University Students Promotion: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (Mahatma Gandhi Central University) पहले और दूसरे वर्ष के ग्रेजुएट कार्यक्रमों के छात्रों और प्रथम वर्ष के अंडरग्रेजुएट छात्रों को बिना परीक्षा के प्रमोट करेगा. छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रमोशन देने का निर्णय इस तथ्य को देखते हुए किया गया है कि सक्रिय COVID-19 मामलों में हालिया उछाल के बीच परीक्षाएं संभव नहीं हैं. विश्वविद्यालय ने छात्रों को बिना एग्जाम प्रमोट करने की घोषणा ट्वीट कर की है. विश्वविद्यालय (MGCU) ने ट्वीट कर लिखा, ”छात्रों को एक बड़ी राहत देते हुए, #MGCU द्वारा यूजी और पीजी के पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को प्रमोट करने का फैसला लिया गया है, क्योंकि देश में बढ़ते कोरोना के बीच परीक्षाएं कराना संभव नहीं है.” बता दें कि विश्वविद्यालय ने 4 अप्रैल को अंतिम सेमेस्टर परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था. महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की अंतिम सेमेस्टर परीक्षाएं 5 अप्रैल से आयोजित होने वाली थीं. कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण कई परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है. कई राज्य...

Vaccination : 1 मई से 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को लगेगा कोरोना वैक्सीन, जानें विस्तार से

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केंद्र सरकार ने कोरोना वैक्सीनेशन पर बड़ा फैसला लिया है। देश में 1 मई से 18 साल से ऊपर का हर व्यक्ति वैक्सीन लगवा सकेगा। वैक्सीनेशन के तीसरे फेज में तेजी से वैक्सीन लोगों को लगाने के लिए यह फैसला लिया गया है। अब तक 45 साल से अधिक आयु के लोगों को ही टीका लगाया जा रहा था। हालांकि दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ओर से युवाओं को भी टीका लगाए जाने की मांग की थी। पीएम नरेंद्र मोदी की देश के शीर्ष डॉक्टरों के साथ विचार मंथन के बाद यह फैसला लिया गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार बीते एक साल से प्रयास कर रही है कि देश में ज्यादा से ज्यादा भारतीयों को कम से कम समय में वैक्सीन दी जा सके। इस मीटिंग में घरेलू कंपनियों को वैक्सीन के अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित करने की बात कही गई है। इसके अलावा अन्य भारतीय और विदेशी वैक्सीन्स को भी मंजूरी देने की बात शामिल है। राज्य सरकारें कर सकेंगी वैक्सीन की खरीद इस मीटिंग में एक अहम फैसला यह भी हुआ है कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां अपने कुल उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा राज्य सरकारों को देंगी, जबकि आधी खेप खुले बाजार...

आज तक क्यों नहीं हुई मोबाइल चोरी होने पर FIR,

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आपबीती घटना, सच्ची घटना बहुत कम ही मिलेंगे आपको      दिनांक 11 फरवरी 2021 की बात है। मैं मोतिहारी शहर के नजदीक चैलाहाँ बाजार में मछली एवं अन्य समाने खरीदने के लिए मोटरसाइकिल से उतरा। उसके बाद मछली देखने लगा। मछली खरीदने के बाद वहीं मछली बाजार में ही एक बड़ा सा किराना दुकान था। घर से माँ का फोन आया था। धनिया और अन्य चीजें खरीद लाने के लिए। जब मेरे पिताजी बोले अमृत मां से फोन कर पूछ लो और क्या चाहिए। तब मैंने कहा पिताजी मोबाइल दीजिएगा। जैसे ही उन्होंने जैकेट के पॉकेट में हाथ लगाया। तो मोबाइल गायब थी। मुझे शक हुआ कि मोबाइल पॉकेट से निकाल लिया गया। वहां उपस्थित लोगों से पूछा मालूम नहीं चला। एक वही परिचित सब्जी वाला से फोन लेकर पिताजी मेरे पास फोन किए। अमृत मोबाइल कोई चुरा लिया। वहां स्थित किराना दुकान में CCTV कैमरा लगा हुआ था। मैं उनसे बोला मेरा मोबाइल चोरी हो गया है। आपका CCTV कैमरा देखना है। तो उन्होंने कहा आप कल सुबह में आइयेगा। उस समय दुकान पर भीड़ नहीं रहती । आराम से दिखा देंगे। और मैं घर आ गया। घर आकर पिताजी बोले अमृत जब मैं मछली खरीद रहा था वहां एक व्यक्ति ...

भारत ने कश्मीर पर पाकिस्तान से सौदेबाजी में कहाँ की चूक

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वर्ष 1965 में गुजरात के कच्छ के रन को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। तब वर्ष 1966 में सोवियत प्रधानमंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अय्यूब खां को ताशकंद में वार्ता के लिए आमंत्रित किए। इसी वार्ता को ताशकंद समझौता कहा जाता है। वर्ष 1971 में इस समझौते को पाकिस्तान दरकिनार कर दिया।  इस समय पूर्वी पाकिस्तान में शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में बांग्ला स्वायत्तता का आंदोलन चल रहा था।तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति और सेना प्रमुख याह्म खान ने बंगालियों पर अत्याचार करने प्रारम्भ कर दिए। बंगाली घर-बार छोड़ भारतीय सीमा में प्रवेश करने लगे। शरणार्थियों  की संख्या भारत में एक करोड़ तक पहुँच गई। इसी बीच पाकिस्तानी वायुसेना ने भारत के हवाई अड्डों पर भीषण बमबारी की। भारत को विवश होकर युद्ध आरम्भ करना पड़ा और अंततः बांग्लादेश स्वंत्रत हो गया तथा पाकिस्तानी सेना ने भारत के समक्ष आत्म समपर्ण कर दिया। भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली और भुट्टो के बीच 3 जुलाई, 1972 को शिमला...

सार्थक एडुविजन में सबसे अव्वल रहा महात्मा गांधी केन्द्रीय विवि

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भोपाल/ मोतिहारी। नीति आयोग, भारतीय शिक्षण मंडल, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, यूजीसी व देश के अग्रणी शिक्षा नियामक संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में सार्थक एडुविजन का आयोजन 15 से 17 मार्च तक भोपाल में किया जा रहा है। सार्थक एडुविजन में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्टॉल का उद्घाटन आज माननीय कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा व डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने संयुक्त रूप से किया।  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि सार्थक एजुविज़न समारोह भारत में शैक्षणिक संवाद और सहयोग को एक नवीन आयाम प्रदान करेगा। नई शिक्षा नीति 2019 के विविध आयामों पर इस तीन दिवसीय शैक्षणिक महाकुंभ में व्यापक स्तर पर चर्चा की जानी है। प्रो. शर्मा ने कहा कि भारत में संवाद एवं विमर्श की बहुत ही सुदृढ़ परम्परा रही है। भारतीय ज्ञान परम्परा विमर्श केंद्रित रही है ऐसे में 21 वीं सदी के भारत के शिक्षा नीति की दिशा तय करने में अपने नाम के अनुरूप यह वैचारिक महाकुंभ शत प्रतिशत सार्थक होगा। मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केन्द...

दिखानी होगी बिहार की ताकत

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महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविधलाय,बिहार में आजादी का अमृत महोत्सव का आयोजन-प्रो. संजीव कुमार शर्मा एवं अन्य अतिथि MGCUB के परिसर में शोधार्थी एवं विद्यार्थी बोले बिहार को बदल कर ही रहेंगे आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 'आजादी का अमृत महोत्सव' माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 मार्च से शुरु किया। इस महोत्सव को लगभग पूरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय मनाया गया। इस दिन से महोत्सव को 75 सप्ताह मनाया जाएगा। यह महोत्सव के जरिए हम अपने अतीत और वर्त्तमान को याद करेंगे। सहीवक्त आ गया है जब हमें सारे देश को दिखाना है कि हमारा बिहार क्या है। इसके लिए जरूरत है लोगों को अपनी सोच बदलने की। सबसे पहले लोगों को पूरी तरह शिक्षित करने की जरूरत है। साथ ही साथ रोजगार के साधन उपलब्ध कराने होंगे। समाज को घूसखोरी से मुक्त करने का संकल्प लेना होगा। आज ही हमें 'आजादी के अमृत महोत्सव' के उपलक्ष्य में यह शपथ लेनी होगी हम बिहार को बदलकर ही दम लेंगे।

खेती से विकास की राह

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बिहार के विकास का सवाल आजादी के 74 सालों बाद भी कायम है। चुनाव के बाद जब सरकारें बनती हैं, तो आमजन के भीतर उम्मीद की किरण पैदा होती है।लेकिन पांच साल बीतते-बितते वह उम्मीद निराश में बदल जाती है।लोग कहने लगते हैं, 'सब एक तरह के हैं।' आम लोग तुलना करने लगते हैं कि आमुक-आमुक उम्मीदवार में ज्यादा ईमानदार कौन है?  यह भी अजीब लगता है, जब आज विकास के मॉडल को लेकर बात होती है। पूछा जाता है कि किस मॉडल से बिहार का विकास होगा? यह सवाल उसमें अंतर्निहित जवाब का संकेत भी कम देता है। इसका मतलब यह हुआ कि अब तक हम जिस विकास मॉडल पर चले, वह कारगर नहीं हुआ। वस्तुतः इसके लिए राज्य का सामाजिक परिवेश, सरकार की नीतियां और भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था जिम्मेदार रही है। तुर्रा यह है कि सरकारें सत्ता में आती रहीं और विकास के दावें करती रहीं। आखिर विकास हुआ, तो राज्य की सिंचाई परियोजनाओं की दशा ऐसी क्यों है? स्वास्थ्य शिक्षा, कानून व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर हम पिछड़े क्यों है? यह विचार करने लायक पहलू है कि केंद्र अथवा राज्य की विकास योजनाओं का लाभ लोगों तक उस रुप में नहीं पहुँच...